व्याकरणमहाभाष्य

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कूर्दयतु अत्र : सुचलनम्, अन्वेषणम्
संकेतों के अर्थ

शिसू-nn = शिवसूत्र संख्या

प-nn = पस्पषाह्निक संख्या


पा-n,n.n = पाणिनि-अध्याय,पद.सूत्र

अकि-n,n.n = अभ्यंकर/कीलहार्न संस्करण-भाग,पृष्ठ.पंक्ति

रो-n,n.n = रोहतक संस्करण-भाग,पृष्ठ.पंक्ति


भा-n/N = कुल N का nवाँ भाग (बड़ी व्याख्या को छोटे-छोटे N समान विषयगत (thematic) भागों में बांटकर रखा गया है)


टिप्पणी 
कात्यायन वर्त्तिकाओं को अभी बोल्ड करना शेष रह गया है।


पस्पषाह्निक
शिवसूत्र


अन्तर्विषयाः

[संपादयतु] अध्याय १

[संपादयतु] पाद १

[संपादयतु] पाद २

[संपादयतु] पाद ३

[संपादयतु] पाद ४


[संपादयतु] अध्याय २

[संपादयतु] पाद १

[संपादयतु] पाद २

[संपादयतु] पाद ३

[संपादयतु] पाद ४


[संपादयतु] अध्याय ३

[संपादयतु] पाद १

[संपादयतु] पाद २

[संपादयतु] पाद ३

[संपादयतु] पाद ४


[संपादयतु] अध्याय ४

[संपादयतु] पाद १

[संपादयतु] पाद २

[संपादयतु] पाद ३

[संपादयतु] पाद ४


[संपादयतु] अध्याय ५

[संपादयतु] पाद १

[संपादयतु] पाद २

[संपादयतु] पाद ३

[संपादयतु] पाद ४


[संपादयतु] अध्याय ६

[संपादयतु] पाद १

[संपादयतु] पाद २

[संपादयतु] पाद ३

[संपादयतु] पाद ४


[संपादयतु] अध्याय ७

[संपादयतु] पाद १

[संपादयतु] पाद २

[संपादयतु] पाद ३

[संपादयतु] पाद ४


[संपादयतु] अध्याय ८

[संपादयतु] पाद १

[संपादयतु] पाद २

[संपादयतु] पाद ३

[संपादयतु] पाद ४


[संपादयतु] सन्दर्भ

  • उपरोक्त सामग्री

यहाँ से Unicode में ली गयी
और Diacritic Conversion - diCrunch v2.00:b5 की सहायता से इसे देवनागरी में परिवर्तित करके तथा कुछ अन्य आवश्यक परिवर्तनों के बाद यहाँ रखा गया। (24-02-2008)

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